भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पुष्टि की है कि अरब सागर के उत्तरी-पूर्वी भाग में एक निम्नदाब अब तेजी से विकसित हो रहा है, और वह जल्द ही एक पूर्ण रूप ले सकता है — जिसका नाम होगा “घूर्णी चक्रवात शक्ति (Cyclone Shakti)”। यह नाम श्रीलंका की ओर से प्रस्तावित किया गया है और तामिल भाषा में ‘शक्ति’ का अर्थ होता है “बल” या “शक्ति”।
वर्तमान स्थिति और गति
IMD की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 8:30 बजे यह निम्नदाब द्वारका से लगभग 240 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम और पोरबंदर से 270 किलोमीटर पश्चिम की ओर स्थित था। यह तेज गति से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है — इसकी अनुमानित रफ्तार लगभग 12 किमी प्रति घंटा है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले 2–3 घंटे में यह निम्नदाब एक तीव्र चक्रवात में परिवर्तित हो सकता है।
संभावित मार्ग और लैंडफॉल
शक्ति चक्रवात प्रारंभ में पश्चिम दिशा की ओर बढ़ेगा और उसके बाद धीरे-धीरे दक्षिण-पश्चिम की ओर मुड़ने की संभावना है। इसका मतलब है कि गुजरात तटवर्ती इलाके (विशेषकर कच्छ एवं आसपास) इस तूफान का अधिक संभावित निशाना बन सकते हैं। INSAT-3D उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों में मध्य-अरब सागर और कच्छ उपसागर में भारी बादल और तूफानी गतिविधियों के संकेत मिल रहे हैं।
खतरे और संभावित असर
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भारी वर्षा: प्रभावित तटीय जिलों में अत्यधिक वर्षा, बिजली गिरने की घटनाएं, और तेज हवाएँ संभव हैं।
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समुद्री गतिविधि: समुद्री क्षेत्रों में तूफानी लहरें और ज्वार-भाटा की स्थिति अधिक खतरनाक हो सकती है।
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संवेदनशील क्षेत्र: कच्छ, पोरबंदर क्षेत्र, गुजरात तटवर्ती जिले, मछुआरे इलाकों आदि में प्रभावित लोग सावधानी रखें।
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तैयारी: स्थानीय प्रशासन, तटवर्ती जिलों की आपदा प्रबंधन इकाइयाँ, मछुआरों को चेतावनी देना, बचाव दल को तत्पर रखना आवश्यक है।
क्या करें — तैयारी सूची
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मौसम विभाग की आधिकारिक विज्ञप्तियाँ और अपडेट लगातार देखें।
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खतरा वाले इलाकों में जरूरत न हो तो बाहर न जाएँ।
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जरूरतमंद सामान (दवाई, टॉर्च, पानी, भोजन) पहले से तैयार रखें।
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कमजोर घरों या तटीय बस्तियों में रहने वालों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण करना।
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मोबाइल चार्ज रखें, बिजली और संचार उपकरणों की तैयारी।
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प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें — खाली कर दिए गए इलाकों में लौटने से पहले “सुरक्षित” का संकेत मिलने का इंतजार करें।
“शक्ति” नाम का यह चक्रवात भारत के पश्चिम तटों के लिए प्रथम चेतावनी है। हम अभी शुरुआत में हैं — यदि यह सिस्टम मजबूत होकर आगे बढ़े, तो गुजरात और आसपास के तटीय इलाके काफी प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए समय रहते जागरूक होना और तैयार रहना ही सबसे बुद्धिमानी है।
लेख का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि पाठकों को सुरक्षित रहने और तत्काल कदम उठाने की प्रेरणा देना है। आप चाहें तो मैं इस पर एक अपडेटेड संस्करण — जैसे कि “लैंडफॉल के बाद की स्थिति” — भी लिख सकता हूँ जब आगे की सूचना आए।








