भारत में 2025 के त्योहारों से पहले सोने की बाजार दरों ने एक नया रिकॉर्ड तोड़ लिया है। 24 कैरेट सोना अब 1,10,000/- प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुँच चुका है, जो पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ती मांग और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता के कारण है।
क्यों बढ़ी कीमतों की रफ्तार?
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त्योहारों का प्रभाव: नवरात्रि और दीवाली जैसे पर्वों के कारण सोने की मांग बढ़ जाती है। उपहार, विवाह, ज्वेलरी की खरीद-फरोख्त में इज़ाफा होता है।
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वैश्विक आर्थिक हालात: डॉलर का कमजोर होना, इंटरेस्ट रेट्स, मुद्रास्फीति और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई-श्रृंखला में अवरोधों से सोने के दामों पर दबाव पड़ता है। इन वजहों से निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों (safe havens) की ओर मुड़ते हैं।
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स्थानीय मार्केट शुल्क और कर: आयात शुल्क, जीएसटी, परिवहन लागत, और मेकिंग चार्ज्स जैसी चीज़ें भी अंतिम कीमत को बढ़ाती हैं।
आज के दाम क्या-क्या हैं?
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24 कैरेट सोना: लगभग 1,10,000/- प्रति 10 ग्राम या उससे ज़्यादा।
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22 कैरेट सोना: करीब 1,00,000/- के स्तर पर।
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चांदी की कीमतें भी बढ़ी हुई हैं, हालाँकि सोने जितनी तेजी नहीं। उपभोक्ताओं के लिए यह संकेत है कि सोना-चांदी दोनों ही अब “महंगी संपत्ति” बन चुकी हैं।
उपभोक्ताओं के लिए सुझाव
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खरीदारी का समय सोच-समझ कर चुनें: यदि कीमतें अभी चरम पर हैं, तो थोड़ा इंतज़ार करना फायदेमंद हो सकता है।
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शुद्धता पर ध्यान दें: 24 कैरेट सोना ज़्यादा शुद्ध होता है लेकिन नर्म भी होता है; ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज, डिज़ाइन, और वारंटी की स्थिति जांचें।
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बदलते दामों को देखें: कीमतें रोज-रोज़ बदलती हैं—लगभग हर दिन अंतर हो सकता है, इसलिए भरोसेमंद स्रोत से अपडेट लेना चाहिए।
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निवेश विकल्पों पर विचार करें: सोना सिक्के, बार या डिज़ाइन ज्वेलरी—इनमें लागत, कर और क्राफ्टिंग की फीस अलग-अलग होती है।
भविष्य की संभावना
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यदि(global) आर्थिक अस्थिरता बनी रही, डॉलर और ब्याज दरों में बदलाव हुआ, तो सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी संभव है।
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दूसरी ओर, यह भी संभव है कि घरेलू क्रय शक्ति कम हो जाए, जिससे मांग में थोड़ी गिरावट आए और कीमतों में सुधार हो।
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त्योहारों के बाद और शादी-मॉसम खत्म होते ही बाजार में हल्की सी स्थिरता आ सकती है।







