भारत में हर वेतन आयोग का उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय और भत्तों में सुधार करना होता है। लेकिन 8वें वेतन आयोग की अधिसूचना ने पेंशनर्स को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार ने पेंशनर्स को आयोग के दायरे से बाहर रखा है, जबकि 7वें वेतन आयोग में पेंशन संशोधन स्पष्ट रूप से शामिल था।
7th Pay Commission की खास बातें
- 7वें वेतन आयोग ने पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स के लिए संशोधन का प्रावधान किया था।
- पेंशन की गणना नए वेतनमान के आधार पर की जाती थी।
- इससे लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सीधा लाभ मिला।
- पुराने पेंशन सिस्टम (OPS) और नए पेंशन सिस्टम (NPS) दोनों पर चर्चा हुई थी।
8th Pay Commission में विवाद क्यों?
- 8वें वेतन आयोग की अधिसूचना में पेंशन संशोधन का उल्लेख नहीं है।
- कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे लगभग 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स प्रभावित होंगे।
- ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर इस मुद्दे को उठाया है।
- मांग की जा रही है कि पेंशनर्स को भी आयोग के दायरे में शामिल किया जाए।
कर्मचारी संगठनों की मांग
- पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग में शामिल किया जाए।
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल किया जाए।
- पेंशन संशोधन को 7वें वेतन आयोग की तरह लागू किया जाए।
- सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की गई है।
पेंशनर्स पर असर
- यदि पेंशन संशोधन शामिल नहीं किया गया, तो लाखों पेंशनर्स को नुकसान होगा।
- महंगाई और बढ़ते खर्चों के बीच पेंशनर्स की आय स्थिर रहेगी।
- इससे सामाजिक और आर्थिक असमानता बढ़ सकती है।
7वें वेतन आयोग में पेंशनर्स को लाभ मिला था, लेकिन 8वें वेतन आयोग की अधिसूचना में उन्हें बाहर रखा गया है। यही कारण है कि कर्मचारी संगठन विरोध कर रहे हैं और सरकार से मांग कर रहे हैं कि पेंशनर्स को भी आयोग के दायरे में शामिल किया जाए।







