भारत सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता के लिए प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण सर्वे 2025 नामक एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस सर्वे का उद्देश्य उन परिवारों को पहचानना है जिनके पास अभी तक पक्का एवं सुरक्षित आवास नहीं है। इस लेख में हम देखेंगे इस सर्वे की पूरी प्रक्रिया, पात्रता, लाभ एवं चुनौतियाँ।
पीएम आवास ग्रामीण सर्वे – एक परिचय
ग्रामीण भारत में आज भी लाखों परिवार पुराने, खपरैल या मिट्टी-ईंट के कच्चे मकानों में रहते हैं। वर्षा, ऊँची तापमान और ठंड के कारण ये घर कई बार टूट-फूट जाते हैं। इन्हीं हालातों को बदलने के लिए सरकार ने इस सर्वे का आरंभ किया है, ताकि हर उपेक्षित परिवार को एक ठोस, सुरक्षित घर मिल सके। इस सर्वे की सहायता से जिन परिवारों को अभी तक पक्का घर नहीं मिला है, उन्हें 2,00,000 तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी (तीन किस्तों में)।
सर्वे की प्रक्रिया और चरण
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स्थानीय सर्वे टीम गठन
पंचायत स्तर पर एक टीम बनाई जाती है जिसमें ग्राम सचिव, स्थानीय प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होते हैं। ये टीम हर घर का दौरा करती है और घर की स्थिति व आर्थिक स्थिति का आंकलन करती है। -
मूल्यांकन दिशा-निर्देश
घर की दीवार, छत का निर्माण सामग्री, कमरों की संख्या, मरम्मत की स्थिति आदि को देखा जाता है। यदि मकान अत्यंत जीर्ण हो या न होना, तो प्राथमिकता दी जाती है। -
डेटा संकलन व जांच
सर्वे के दौरान तस्वीरें और GPS लोकेशन भी ली जाती हैं और डेटा डिजिटल रूप से संग्रहित किया जाता है। यह स्थानीय, जिला और राज्य स्तर पर समीक्षा के लिए भेजा जाता है। -
पात्रता जाँच एवं सूची निर्माण
प्राथमिक सूची तैयार कर ग्राम सभा स्तर पर प्रदर्शित की जाती है, ताकि यदि किसी को आपत्ति हो, तो दर्ज हो सके। फर्जी दावे या गलत जानकारी देने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
पात्रता मापदंड
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परिवार के पास अभी पक्का मकान नहीं होना चाहिए या मकान बहुत जर्जर स्थिति में होना चाहिए।
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परिवार को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (BPL सूची, अनुसूचित जाति / जनजाति, अल्पसंख्यक आदि) में होना चाहिए।
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आवेदक के पास अपनी भूमि होनी चाहिए — यदि नहीं है, तो सरकार भूमि उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी।
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परिवार की आय अधिक सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए और कोई सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए।
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विधवा, दिव्यांग और बूढ़े व्यक्ति जो देखभाल करने वाला न हो, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
आर्थिक सहायता एवं वितरण
चयनित लाभार्थियों को 2,00,000 की सहायता दी जाएगी, लेकिन यह एक ही बार नहीं बल्कि तीन किस्तों में दी जाती है —
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पहली किस्त: नींव और प्लinth तक का निर्माण कार्य पूरा होने पर
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दूसरी किस्त: दीवार एवं छत का निर्माण कार्य पूरा होने पर
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तीसरी किस्त: पूरे घर के समापन एवं सत्यापन के बाद
इस राशि का सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में DBT (डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हस्तांतरण किया जाता है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम हो जाती है।
साथ ही, यदि ग्रामवासियों को मनरेगा योजना के अंतर्गत मजदूरी करनी हो, तो उस विकल्प का लाभ भी उन्हें मिल सकता है।
सामाजिक और दीर्घकालिक प्रभाव
पक्का घर मिलने से सिर्फ सुरक्षा ही नहीं बढ़ती, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा भी मजबूत होती है। बच्चों को अध्ययन के लिए बेहतर माहौल मिलता है, स्वास्थ्य बेहतर रहती है और महिलाओं को सुरक्षा का एहसास होता है।
इसके अलावा, घर निर्माण से स्थानीय रोजगार उत्पन्न होता है, निर्माण सामग्री की मांग बढ़ती है, और छोटे व्यवसायों को लाभ मिलता है। यह गांव-शहर असममित विकास को सुधारने में भी सहायक हो सकता है।
चुनौतियाँ और सुझाव
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सर्वे की निष्पक्षता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है — स्थानीय दबाव या भ्रष्टाचार से बचाव करना होगा।
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सही डेटा और नवीनतम जानकारी सुनिश्चित करनी होगी।
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लोग जागरूक नहीं हैं — उन्हें योजना की जानकारी और प्रक्रिया समझाना आवश्यक है।
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कुछ परिवारों के पास जमीन नहीं है — ऐसे मामलों में सरकारी व्यवस्था कारगर होनी चाहिए।
पीएम आवास ग्रामीण सर्वे 2025 देश की दिशा को एक कदम आगे ले जाने वाली योजना है, जो लाखों ग्रामीण परिवारों को पक्का और सुरक्षित घर प्रदान करने का लक्ष्य रखती है। यदि आप भी इस योजना के अंतर्गत आवेदन करना चाहते हैं, तो अपने ग्राम पंचायत या ब्लॉक कार्यालय में जाकर जानकारी लें और समय रहते आवेदन कर देखें। सरकारी वेबसाइट और स्थानीय अधिकारियों से सत्यापित जानकारी अवश्य प्राप्त करें।






